Skip to main content

Posts

Why ishq par zor nahi went off air? | reason behind the TRP ratings | piracy | vrindavan productions

       Serial Ishq Par zor Nahi went off air .           According to the news, the reason behind this is TRP. the show could not able to grab attention of the viewer's, but is this really the reason behind it? I don't think so, because the serial which has a good story, actors, directors, didn't deserve to go off air. we know the viewership of the show is very high so why the show could not survive in the TRP ratings?           let's see the facts. The show has a large number of fans who create videos related to the show like memes, vlogs and many more and post it on YouTube and other social media platforms. But with that many fans are well, we cannot call them fans, enemies of the show who posted daily episodes on YouTube and other social media platforms. And interestingly, the episodes were available from the very first day of the show.           How do they do that ill...

तक्षशिला विश्वविद्यालय | Takshshila vishwavidyalaya | vrindavanproductionsblogspot.com

  तक्षशिल पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के रावलपिंडी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण प्राचीन शहर है। ये अपने समय में सभी विश्वविद्यालयों का जनक रह चूका है । ये आज के जैसे विश्वविद्यालयों जैसा नहीं था , लेकिन ये कई महान शिक्षकों का घर हुआ करता था।   इतिहास में खो गया तक्षशिला क्यूंकि तक्षशिला का बड़ा सांस्कृतिक और भौगोलिक महत्व था , इसलिए कई शासकों ने तक्षशिला पर हमले किए - जिनमें यूनानी , कुषाण और फारसी शामिल थे। आखिरकार , 5 वीं शताब्दी तक , हुना जनजाति ने तक्षशिला को पूरी तरह से नष्ट कर दिया । इस प्राचीन शहर को 19 वीं शताब्दी में एक पुरातत्वविद सर अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा खोजा गया ।   नाम में ही सब कुछ है तक्षशिला का जिक्र रामायण और महाभारत में भी मिलता है। भगवान राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर इस का नाम तक्षशिला रखा गया और आगे जाके तक्ष्य के राज्य की राजधानी बना I   कोई फीस नहीं , कोई परीक्षा नहीं तक्षशिला में कोई तय पाठ्यक्रम या शिक्षा का तरीका नहीं था। कई महान शिक्षकों ने यहां बड़ी संख्या में छात्रों को पढ़ाया है । तक्षशिला में एक खास बात थी की कोई...

बस इतनी सी चाहत है तेरे होठों की मुस्कान बन जाऊ

  तेरी एक मुस्कान से ही मेरी सारी थकान दूर हो जाती है कुछ अलग ही एहेसास होता है जब तू मेरे पास आती है जी करता है तेरी प्यारी बातो में ही खो जाऊं बस इतनी सी चाहत है तेरे होठों की मुस्कान बन जाऊ। -Dhiraj kumar

How to create a poster from simple image | Using PicsArt | creativity 2020

                         Hello , On this channel you will get to see many creativity videos like photo editing, video editing, computer programming, logo making, 3D graphics creation. If you want to watch such videos, subscribe to the channel and notify the notification bell and share it with friends. Thank you!!

हर दिन सावन!!

हवाओ में भी महक है, जिसमे खींचे चले जाये, बागो में यौवन सी है, मन मचला सा जाये, सुन्दरता तेरी इतनी है, चंदा भी शरमा जाये, आया ऐसा दिन आज है, फिर न मिल न पाए, सावन के सुन्दर ये दिन, मन भर न पायें, छोड़ न जाना हमको कभी, हर दिन सावन आये, हर दिन सावन आये। #hindikavita #vrindavanproductions

Are your childhood memories false?

आपल्या आजूबाजूला लहान बाळं खेळताना बागडताना पाहिली किंवा आपल्याच घरात जर लहान मूल असेल तर आपण त्यांच्याबरोबर पुन्हा आपलं बालपण जगून घेतो. त्यांचे सुंदर निरागस भाव आणि बोबडे बोल ऐकून आपण सुद्धा आपल्या बालपणाच्या सुंदर आठवणींत रमून जातो आणि “बालपण देगा देवा” अशी इच्छा करू लागतो. बालपणी कसे सगळे आपले लाड करायचे, आपले हट्ट पूर्ण करायचे, आजोबा फिरायला न्यायचे, आजी सुंदर गोष्टी सांगायची, काका/मामा खाऊ आणायचे.. मावशी/आत्या लाड, कौतुक करायची, आई मायेने जेवू घालायची, बाबा खांद्यावर बसवून नव्या नव्या गोष्टी शिकवायचे अश्या आठवणी प्रत्येकाच्याच मनात साठवून ठेवलेल्या असतात. तीन वर्षांपर्यंतच्या ह्या आठवणी अगदी स्पष्ट आठवत नसल्या तरी त्या धूसर धूसर आठवत असतात व ह्याच आठवणी आपल्याला परत बालपणाची सैर करवून आणतात. पण आता काही शास्त्रज्ञांनी मात्र आपल्या ह्या आनंदाला सुरुंग लावला आहे. त्यांच्या मते आपल्या तीन वर्षांचे होईपर्यंतच्या सगळ्या आठवणी ह्या खोट्या किंवा काल्पनिक असतात. ह्या आठवणी मोठ्यांनी सांगितलेले आपल्या बालपणीचे प्रसंग, थोडीशी धूसर आठवण व आपले बालपणीचे फोटो ह्यावरून तयार झालेल्...

Don't capture birds....

#nature #vrindavanproduction #birdresearch लॉकडाउन के समय में हम सब जान चुके हे की एक जगह केद रेहेने से कैसा महसूस होता है, जैसे जिदगी के सी गई हो। पर जिन पंछियोंको हम सालो-साल पिंजरेमें कैद करके रखते है उन्हें कैसा महसूस होता होगा। आज कल हमारे घर के आस पास पंछी क्यों नहीं आते,कभी विचार किया है? क्यूंकि आज हमारे घरको आँगन ही नहीं रहे ना ही पेड़-पौधे | तब ऐसे घरोंके लोग अपने मनोरंजन के लिए पंछियों को पिंजरे में कैद कर घरमे रखते है। पंछी हमारे मनोरंजन का साधन नहीं हो सकते अगर आपको पछियोसे इतना ही लगाव हे तो अपने घरके आंगन में पछियोंके लिए रोज अनाज डालिए और ठन्डे पानी का इंतजाम कीजिये फिर देखिये हररोज पंछी कैसे आपके आँगन की रोनक बढ़ाएंगे।